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“गोदान न केवल ग्रामीण जीवन का, बल्कि समूचे भारतीय जीवन की समस्याओं तथा यत्किंचित् सम्भावनाओं का आख्यान है।” इस स्थापना का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण कीजिए। (UPSC 2018, 20 Marks, )
“गोदान न केवल ग्रामीण जीवन का, बल्कि समूचे भारतीय जीवन की समस्याओं तथा यत्किंचित् सम्भावनाओं का आख्यान है।” इस स्थापना का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण कीजिए।View Answer
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“चूंकि कृषक जीवन की समस्या उस समय के भारत की मुख्य समस्या थी, इसलिए “गोदान” में कृषक जीवन की ट्रेजडी का आख्यान मानों युगीन समस्याओं का प्रतिनिधि आख्यान है।” इस कथन की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। (UPSC 2017, 20 Marks, )
“चूंकि कृषक जीवन की समस्या उस समय के भारत की मुख्य समस्या थी, इसलिए “गोदान” में कृषक जीवन की ट्रेजडी का आख्यान मानों युगीन समस्याओं का प्रतिनिधि आख्यान है।” इस कथन की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए।View Answer
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प्रेमचंद ने हिन्दी में पहली बार गाँव और कृषक जीवन को अपने उपन्यास-लेखन का केंद्रीय विषय बनाया। “गोदान” के माध्यम से प्रेमचंद की उक्त औपन्यासिक-दृष्टि की सांस्कृतिक समीक्षा प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 2016, 15 Marks, )
प्रेमचंद ने हिन्दी में पहली बार गाँव और कृषक जीवन को अपने उपन्यास-लेखन का केंद्रीय विषय बनाया। “गोदान” के माध्यम से प्रेमचंद की उक्त औपन्यासिक-दृष्टि की सांस्कृतिक समीक्षा प्रस्तुत कीजिए।View Answer
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हिन्दी उपन्यास की आधुनिकता की चर्चा 'गोदान' से शुरू होती है। देसी आधुनिकता के कौन-कौन से तत्व 'गोदान' को आधुनिक सिद्ध करते हैं? स्पष्ट कीजिए। (UPSC 2012, 30 Marks, )
हिन्दी उपन्यास की आधुनिकता की चर्चा 'गोदान' से शुरू होती है। देसी आधुनिकता के कौन-कौन से तत्व 'गोदान' को आधुनिक सिद्ध करते हैं? स्पष्ट कीजिए।Enroll Now
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क्या आपको 'गोदान' पढ़ते हुए यह लगता है कि होरी का जीवन दुःख का एक लम्बा नाटक है जिसमें सुख के भी कुछ दृश्य हैं? प्रमाण सहित उत्तर दीजिए। (UPSC 2008, 60 Marks, )
क्या आपको 'गोदान' पढ़ते हुए यह लगता है कि होरी का जीवन दुःख का एक लम्बा नाटक है जिसमें सुख के भी कुछ दृश्य हैं? प्रमाण सहित उत्तर दीजिए।Enroll Now
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अपने उपन्यासों एवं कहानियों में प्रेमचन्द की बुनियादी चिन्ताएं अपने समय की भी हैं और भविष्य की भी हैं। इस विचार से आप कहां तक सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर लिखिए। (UPSC 2004, 60 Marks, )
अपने उपन्यासों एवं कहानियों में प्रेमचन्द की बुनियादी चिन्ताएं अपने समय की भी हैं और भविष्य की भी हैं। इस विचार से आप कहां तक सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर लिखिए।Enroll Now
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सभी प्रकार के मानवों को गहराई से समझने के साथ-साथ प्रेमचन्द, सभी पात्रों का सहज मानवीय सहानुभूति के साथ चित्रण भी करते हैं। — ‘गोदान’ के पात्रों के सम्बन्ध में निरूपित कीजिए। (UPSC 1991, 55 Marks, )
सभी प्रकार के मानवों को गहराई से समझने के साथ-साथ प्रेमचन्द, सभी पात्रों का सहज मानवीय सहानुभूति के साथ चित्रण भी करते हैं। — ‘गोदान’ के पात्रों के सम्बन्ध में निरूपित कीजिए।Enroll Now
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“अभिजात वर्ग और नागरिक जीवन का चित्रण प्रेमचन्द ने बहुत कम किया है; और जहाँ ऐसे स्थल पाए हैं वहाँ उनका मन रमा नहीं है।” — ‘गोदान’ झी इस आधार पर समीक्षा कीजिए। (UPSC 1985, 55 Marks, )
“अभिजात वर्ग और नागरिक जीवन का चित्रण प्रेमचन्द ने बहुत कम किया है; और जहाँ ऐसे स्थल पाए हैं वहाँ उनका मन रमा नहीं है।” — ‘गोदान’ झी इस आधार पर समीक्षा कीजिए।Enroll Now
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“मानवमन की अनुभूतियां एवं संवेदनाएं ही प्रेमचंद की कहानियों का मुख्य आधार हैं।” — “मानसरोवर” (भाग एक) की कहानियों पर इस दृष्टि से विचार कीजिए। (UPSC 1985, 55 Marks, )
“मानवमन की अनुभूतियां एवं संवेदनाएं ही प्रेमचंद की कहानियों का मुख्य आधार हैं।” — “मानसरोवर” (भाग एक) की कहानियों पर इस दृष्टि से विचार कीजिए।Enroll Now
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“सबसे उत्तम कहानी वह होती है, जिसका आधार किसी मनोवैज्ञानिक सत्य पर हो।” इस कथन से क्या आप सहमत हैं ? “मान-सरोवर' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।। (UPSC 1983, 55 Marks, )
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'मानव चरित्र पर प्रकाश डालना और उसके रहस्यों को खोलना ही उपन्यास का मूल तत्व है।‘ अपनी इस मान्यता को “गोदान” में उपस्थित करने में लेखक कहाँ तक सफल है ? (UPSC 1981, 55 Marks, )
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“मानव मन की अनुभूतियाँ एवं संवेदनाएँ ही प्रेमचन्द की कहानियों का मुख्य आधार है। ‘मानसरोवर’ में संकलित कहानियों के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए। (UPSC 1981, 55 Marks, )
“मानव मन की अनुभूतियाँ एवं संवेदनाएँ ही प्रेमचन्द की कहानियों का मुख्य आधार है। ‘मानसरोवर’ में संकलित कहानियों के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।Enroll Now
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