दक्खिनी हिन्दी के साहित्यिक विकास के ऐतिहासिक और सामाजिक कारण। (UPSC 2016, 10 Marks, )

Theme: दक्खिनी हिन्दी साहित्य का ऐतिहासिक विकास Where in Syllabus: (Modern Indian History)
दक्खिनी हिन्दी के साहित्यिक विकास के ऐतिहासिक और सामाजिक कारण।

Introduction

दक्खिनी हिन्दी के साहित्यिक विकास के पीछे ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों में भक्तिकाल और सूफी आंदोलन का प्रभाव प्रमुख है। अमीर खुसरो और कुतुबन जैसे कवियों ने इस भाषा को समृद्ध किया। गोलकुंडा और बीजापुर के दरबारों में इसे संरक्षण मिला। सामाजिक दृष्टिकोण से, यह भाषा विभिन्न संस्कृतियों के संगम का परिणाम है, जिसने इसे एक अनूठी पहचान दी। दक्खिनी हिन्दी ने स्थानीय बोलियों और फारसी के साथ मिलकर एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा का निर्माण किया।

दक्खिनी हिन्दी साहित्य का ऐतिहासिक विकास

 ● राजनैतिक कारण:  
    ● अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण अभियान के दौरान उत्तर भारत के अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी आदि दक्षिण भारत के क्षेत्रों जैसे बीजापुर, गोलकुंडा, देवगिरि में गए। उनके साथ हिन्दवी भाषा का भी प्रसार हुआ।  
    ● मुहम्मद तुगलक के आदेश से दिल्ली के राजदरबारी प्रशासक, सैनिक, कर्मचारी, व्यापारी, सूफी संतों को देवगिरि (दौलताबाद) में बसने के लिए मजबूर किया गया, जिससे हिन्दी का दक्षिण में प्रसार हुआ।  
  ● सामाजिक और सांस्कृतिक कारण:  
    ● सूफी संतों ने धर्मप्रचार के उद्देश्य से हिन्दी को अपनाया, जिससे भाषा का प्रसार हुआ।  
        ○ उत्तर से दक्षिण गए लोगों की बोलचाल में अरबी-फारसी और दक्षिण की तेलुगु, कन्नड़, मराठी भाषाओं का प्रभाव पड़ा, जिससे दक्खिनी हिन्दी का विकास हुआ।
  ● भाषाई मिश्रण:  
        ○ दक्खिनी हिन्दी वास्तव में हिन्दी-फारसी के मिश्रण से युक्त एक भाषा के रूप में विकसित हुई। इसका मूल भाषिक और व्याकरणिक स्वरूप कौरवी-हरियाणवी का था और बाह्य कलेवर (लिपिक आवरण) फारसी का था।
  ● उदाहरण:  
        ○ वली का शेर: "जिसे इश्क का तीर कारी लगे, उसे जिंदगी क्यों न भारी लगे।"
        ○ कुली कुतुबशाह का शेर: "चंद्र सूर तेरे नूर थे, निस दिन को नूराली किया। तेरी सिफत किन कर सके, ते आपी है मेरा जिया।"
 इन बिंदुओं से स्पष्ट होता है कि दक्खिनी हिन्दी का साहित्यिक विकास विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक कारणों से प्रभावित हुआ।

Conclusion

दक्खिनी हिन्दी के साहित्यिक विकास के ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों में भक्ति आंदोलन, सूफी परंपरा, और मुगल शासन का योगदान महत्वपूर्ण है। कबीर और मीरा जैसे संतों ने इसे जनमानस तक पहुँचाया। सूफी संतों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बनाया। मुगल दरबार में इसे संरक्षण मिला। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, "भाषा का विकास समाज के विकास से जुड़ा है।" आगे बढ़ने के लिए, दक्खिनी हिन्दी के साहित्य को आधुनिक संदर्भों में पुनःप्रकाशित करना आवश्यक है।