यह पुण्य भूमि प्रसिद्ध है इसके निवासी ‘आर्य्य’ हैं विद्या, कला-कौशल्य सबके जो प्रथम आचार्य्य हैं। सन्तान उनकी आज यद्यपि हम अधोगति में पड़े; पर चिह्न उनको उच्चता के आज भी कुछ हैं खड़े।। (‘भारत-भारती’, मैथिलीशरण गुप्त, ‘अतीत खण्ड’, पद-17, पृष्ठ-15)।
(UPSC 2000, 20 Marks, )