शत-शुद्धि-बोध—सूक्ष्मातिसूक्ष्म मन का विवेक, जिनमें है छात्रधर्म का धृत पूर्णाभिषेक, जो हुए प्रजापतियों से संयम से रक्षित, वे शर हो गए आज रण में श्रीहत, खंडित! (UPSC 1980, 20 Marks, )

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