वह रहस्यमय व्यक्ति अब तक न पायी गयी मेरी अभिव्यक्ति है पूर्ण अवस्था वह निज-संभावनाओं निहित प्रभावों, प्रतिमाओं की, मेरे परिपूर्ण की आविर्भाव हृदय में रिस रहे ज्ञान का तनाव वह, आत्मा की प्रतिमा। (UPSC 1984, 20 Marks, )

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