दिग्दाहों से धूम उठे, या जलघर उठे क्षितिज तट के। सधन गगन में भीम प्रकम्पन, झंझा के चलते झटके ॥ अन्धकारे में मलिन मित्त की धुंधली आभा लीन हुई; वरुण व्यस्त थे, घनी कालिमा स्तर स्तर जमती पीन हुई। (UPSC 1988, 20 Marks, )

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