कुहुकि कुहुकि जसि कोइल रोई । रकत आँसु घुँघुची बन बोई ।। पै कर मुखी नैन तन राती । को सिराव बिरहा दुःख ताती ।। (UPSC 2025, 10 Marks, )

कुहुकि कुहुकि जसि कोइल रोई । रकत आँसु घुँघुची बन बोई ।। पै कर मुखी नैन तन राती । को सिराव बिरहा दुःख ताती ।।