नटनंदन मोहन सों मधुकर! है काहे की प्रीत? जौ कीजै तो है जल, रवि औ जलधर की सी रीति॥ जैसे मीन, कमल, चातक को ऐसे ही गई बीति। तलफत, जरत, पुकारत सुनु, सठ। नाहिं न है यह रीति॥
(UPSC 2023, 10 Marks, )
नटनंदन मोहन सों मधुकर! है काहे की प्रीत? जौ कीजै तो है जल, रवि औ जलधर की सी रीति॥ जैसे मीन, कमल, चातक को ऐसे ही गई बीति। तलफत, जरत, पुकारत सुनु, सठ। नाहिं न है यह रीति॥
नटनंदन मोहन सों मधुकर! है काहे की प्रीत? जौ कीजै तो है जल, रवि औ जलधर की सी रीति॥ जैसे मीन, कमल, चातक को ऐसे ही गई बीति। तलफत, जरत, पुकारत सुनु, सठ। नाहिं न है यह रीति॥
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