“मुक्तिबोध रचित ‘ब्रह्मराक्षस’ की उपलब्धि है भयानक अंगीरस, तिलिस्मी ‘वस्तु’ और आवेग — कल्पना-संवेदना का संगम।” इस कथन की समीक्षा कीजिए। (UPSC 2018, 15 Marks, )

“मुक्तिबोध रचित ‘ब्रह्मराक्षस’ की उपलब्धि है भयानक अंगीरस, तिलिस्मी ‘वस्तु’ और आवेग — कल्पना-संवेदना का संगम।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।