“सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं-जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं। भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।” – को दृष्टिगत कर गोस्वामी जी के पक्ष को समर्थ ढंग से उद्घाटित कीजिए।। (UPSC 1997, 55 Marks, )

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