“विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्तंभित विश्व महान; यही दुख सुख विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान। नित्य समरसता का अधिकार, उमड़ता कारण जलधि समान; व्यथा में नीली लहरों बीच बिखरते सुख मणि गण द्युतिमान!” (UPSC 2006, 20 Marks, )

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