“कष्ट हृदय की कसौटी है - तपस्या अग्नि है - सम्राट! यदि इतना भी न कर सके तो क्या! सब क्षणिक सुखों का अंत है। जिसमें सुखों का अंत न हो, इसलिए सुख करना ही न चाहिए। मेरे इस जीवन के देवता और उस जीवन के प्राप्य! क्षमा!” (UPSC 2014, 10 Marks, )

“कष्ट हृदय की कसौटी है - तपस्या अग्नि है - सम्राट! यदि इतना भी न कर सके तो क्या! सब क्षणिक सुखों का अंत है। जिसमें सुखों का अंत न हो, इसलिए सुख करना ही न चाहिए। मेरे इस जीवन के देवता और उस जीवन के प्राप्य! क्षमा!”