इस कहानी में देखो, "धर्म संस्कृति का आदर्श नियम है, इसलिए धर्म की बुराइयाँ संस्कृति में पैदा होती हैं, इसलिए संस्कृति बुरी है" — यह केवल तर्कना-शक्ति का, नट का तमाशा है। संस्कृति की बुराई अगर हमें दिखती है, तो संस्कृति में स्पष्ट देखनी होगी, इस प्रकार दूर से सिद्ध नहीं करनी होगी। नहीं तो, अच्छा कुछ है ही नहीं, बुराई ही बुराई है, और यह हमारी अशांति भी तो उस बुराई में पैदा हुआ मनोविकार है: मानव बुरा होकर अच्छी बात सोच कैसे सकता है? आप अन्धकार दूर करना चाहें तो यही कर सकते हैं कि रोशनी जला दें, यह नहीं कर सकते कि अन्धकार का अधियारापन मिटा दें। (UPSC 1986, 20 Marks, )

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