‘चिन्तामणि’ के निबंधों को आचार्य शुक्ल ने अपनी “अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश” कहा है, जिनमें यात्रा के लिए बुद्धि हृदय को साथ लेकर निकलती रही है। इस कथन के प्रकाश में उनके किसी एक निबंध का सोदाहरण विवेचन कीजिए। (UPSC 1987, 55 Marks, )

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