“आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों में भावों की भव्यता है, अभिव्यंजना प्रणाली की नव्यता है, विचारों की तीव्रता है, संस्कृति की सशक्त अभिव्यक्ति है और संतुलन की आमोद शक्ति है।” — इस कथन का संपरीक्षण कीजिए। (UPSC 1997, 55 Marks, )

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