नित्य-यौवन छवि से हो दीप्त विश्व की करुण कामना मूर्ति, स्पर्श के आकर्षण से पूर्ण प्रकट करती ज्यों जड़ में स्फूर्ति। उषा की पहिली लेखा कांत, माधुरी से भीगी भर मोद, मद भरी जैसे उठे सलज्ज भोर की तारक-द्युति की गोद।। (UPSC 2010, 20 Marks, )

Enroll Now