यह क्या मधुर-स्वप्न-सी झिलमिल सदय हृदय में अधिक अधीर व्याकुलता-सी व्यक्त हो रही आशा बन कर प्राण-समीर। यह कितनी स्पृहणीय बन गई मधुर जागरण-सी छविमान स्मिति की लहरों-सी उठती है नाच रही ज्यों मधुमय तान। (UPSC 1999, 20 Marks, )

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