एक पगली-सी स्मृति, एक उद्भ्रान्त भावना चैपल के शीशों के परे पहाड़ी सूखी हवा में झुकी हुई वीपिंग 'विलो' की काँपती टहनियाँ, पैरों तले चीड़ के पत्तों की धीमी-सी चिर-परिचित खड़-खड़—वहीं पर गिरीश एक हाथ में मिलिटरी का खाकी हैट लिए खड़ा है—चौड़े, उठे सबल कन्धे, अपना सिर वहाँ टिका दो तो जैसे सिमटकर खो जायगा....।
(UPSC 2019, 10 Marks, )
एक पगली-सी स्मृति, एक उद्भ्रान्त भावना चैपल के शीशों के परे पहाड़ी सूखी हवा में झुकी हुई वीपिंग 'विलो' की काँपती टहनियाँ, पैरों तले चीड़ के पत्तों की धीमी-सी चिर-परिचित खड़-खड़—वहीं पर गिरीश एक हाथ में मिलिटरी का खाकी हैट लिए खड़ा है—चौड़े, उठे सबल कन्धे, अपना सिर वहाँ टिका दो तो जैसे सिमटकर खो जायगा....।
एक पगली-सी स्मृति, एक उद्भ्रान्त भावना चैपल के शीशों के परे पहाड़ी सूखी हवा में झुकी हुई वीपिंग 'विलो' की काँपती टहनियाँ, पैरों तले चीड़ के पत्तों की धीमी-सी चिर-परिचित खड़-खड़—वहीं पर गिरीश एक हाथ में मिलिटरी का खाकी हैट लिए खड़ा है—चौड़े, उठे सबल कन्धे, अपना सिर वहाँ टिका दो तो जैसे सिमटकर खो जायगा....।
(UPSC 2019, 10 Marks, )