''छायावाद के बाद कविता बहुमुखी रूप धारण करने लगती है।'' - इस कथन के आधार पर छायावादोत्तर हिन्दी कविता की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए। (UPSC 1999, 60 Marks, )

Enroll Now