“'बिगड़नेवाली बात को तो सभी पहले से जान लेते हैं; जिनके पास बल है, उसे नहीं होने देते, जो कमजोर हैं। उसे धोखा कहकर छिपाते हैं “बाबू को सब मालूम हो गया था, पर अच्छे घर-वर के लिए जो चाहिए वह बाबू कहाँ से लाते। इसमें तुम तो एक बहाना बन गये, तुम्हारा क्या कसूर है इसमें....” । (UPSC 2003, 20 Marks, )

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