प्रेम अमिय मंदरु विरहु भरत पयोधि गँभीर। मथि काढेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुवीर॥ को दृष्टिगत कर गोस्वामी जो के पक्ष को समर्थ ढंग से उद्घाटित कीजिए।। (UPSC 1994, 55 Marks, )

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