रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों को सामने रखकर स्वयं उन्हीं के इस कथन की समीक्षा कीजिए कि “यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसोटी है तो निबंध-गद्य की कसौटी है।” (UPSC 1982, 55 Marks, )

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