मातु पिता भगिनी प्रिय भाई। प्रिय परिवारु सुह्रद समुदाई।। सासु ससुर गुर सजन सहाई। सुत सुंदर सुसील सुखदाई।। जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।। तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।। भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।। प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।। जिय बिनु देह नदी बिनु बारी। तैसिअ नाथ पुरुष बिनु नारी।। नाथ सकल सुख साथ तुम्हारें। सरद बिमल बिधु बदनु निहारें।।
(UPSC 1992, 20 Marks, )
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मातु पिता भगिनी प्रिय भाई। प्रिय परिवारु सुह्रद समुदाई।। सासु ससुर गुर सजन सहाई। सुत सुंदर सुसील सुखदाई।। जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।। तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।। भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।। प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।। जिय बिनु देह नदी बिनु बारी। तैसिअ नाथ पुरुष बिनु नारी।। नाथ सकल सुख साथ तुम्हारें। सरद बिमल बिधु बदनु निहारें।।
(UPSC 1992, 20 Marks, )