18-19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन कीजिए। (UPSC 2024, 15 Marks, )

Theme: ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन Where in Syllabus: (Modern History)
18-19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन कीजिए।

Introduction

18-19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन उनके सांस्कृतिक और धार्मिक उद्देश्यों के संदर्भ में किया जा सकता है। विलियम केरी और अलेक्जेंडर डफ जैसे मिशनरियों ने स्थानीय भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद कर शिक्षा का प्रसार किया। इनकी नीति का उद्देश्य स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करना था, जिससे भाषाई और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा मिला। मिशनरियों की भाषा नीति ने शिक्षा और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन

 ● भारतीय भाषाओं का अनुवाद:  
        ○ भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी में अनुवाद का कार्य 1785 में शुरू हुआ।
        ○ प्रारंभिक अनुवाद संस्कृत से किए गए थे, जिसे यूरोप में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक खोज माना गया।
  ● सर विलियम जोन्स का योगदान:  
        ○ 1796 में सर विलियम जोन्स ने संस्कृत को अद्भुत संरचना वाली भाषा घोषित किया।
        ○ इसने तुलनात्मक भाषा-वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत की और भारतीय-यूरोपीय भाषा परिवार की अवधारणा को जन्म दिया।
  ● ईस्ट इंडिया कंपनी और मिशनरियों के स्वार्थ:  
        ○ कंपनी ने वैधानिक संधियों और सरकारी कामकाज के अनुवाद के लिए अच्छा भुगतान किया।
        ○ 1800 में कलकत्ता में कॉलेज ऑफ फोर्ट विलियम की स्थापना की गई ताकि ब्रिटिश कर्मचारियों को भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षित किया जा सके।
  ● मिशनरियों की भूमिका:  
        ○ मिशनरियों ने बाइबिल के उपदेश और पश्चिमी शिक्षा के प्रसार के माध्यम से ईसाई धर्म का प्रचार किया।
        ○ उन्होंने भारतीय साहित्य और भाषा के विकास में योगदान दिया, जैसे कि असमिया भाषा में अमेरिकन बैपटिस्ट मिशनरियों की भूमिका।
  ● प्रमुख मिशनरी विद्वान:  
        ○ रॉबर्टो द नोबिली ने संस्कृत, तेलुगु और तमिल में योगदान दिया।
        ○ डेनमार्क के पादरी जीजेनबाला ने तमिल में बाइबिल का अनुवाद किया।
        ○ थॉमस स्टीफेंस ने कोंकणी में 'क्रिश्चियन पुराण' लिखा।
  ● प्रिंटिंग प्रेस और अनुवाद कार्य:  
        ○ बैपटिस्ट मिशनरियों ने श्रीरामपुर में प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया और बाइबिल का अनुवाद लगभग 40 भारतीय भाषाओं में किया।
        ○ बंगाल में उन्होंने अंग्रेजी और बांग्ला में पत्रिकाएं प्रकाशित कीं।
  ● शिक्षा में योगदान:  
        ○ मिशनरी स्कूलों ने भारतीय भाषाओं को पढ़ाई के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया और अंग्रेजी भी सिखाई।
        ○ कंपनी ने इन स्कूलों को वित्तीय सहायता और संरक्षण दिया।
  ● विलियम केरी और किर्नाडर का योगदान:  
        ○ विलियम केरी के बाद किर्नाडर बंगाल में अग्रणी मिशनरी थे।
        ○ उन्होंने बांग्ला में बाइबिल के "न्यू टेस्टामेंट" का अनुवाद किया और धार्मिक शिक्षा का प्रसार किया।
 इन बिंदुओं के माध्यम से, 18-19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति का मूल्यांकन किया जा सकता है।

Conclusion

18वीं-19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों की भाषा नीति ने भारतीय भाषाओं के अध्ययन और प्रसार में योगदान दिया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद किया, जिससे शिक्षा का प्रसार हुआ। हालांकि, उनका उद्देश्य धार्मिक परिवर्तन था। विलियम केरी जैसे मिशनरियों ने भाषाई विकास में योगदान दिया। आगे बढ़ते हुए, हमें भाषाई विविधता को संरक्षित करते हुए सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना चाहिए। महात्मा गांधी ने कहा था, "भाषा का विकास समाज का विकास है।"