कवित्व वर्णमय चित्र है, जो स्वर्गीय भावपूर्ण संगीत गाया करता है। अंधकार का आलोक से, असत् का सत् से, जड़ का चेतन से और बाह्य जगत का अन्तर्जगत से संबंध कौन कराती है, कविता न? (‘स्कन्दगुप्त’ नाटक, जयशंकर प्रसाद, प्रथम अंक, तृतीय दृश्य, पृष्ठ 47)। (UPSC 2000, 20 Marks, )

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