हे अभाव की चपल बालिके, री ललाट की खलखेला हरी-भरी-सी दौड़-धूप, ओ जल-माया की चल-रेखा। इस ग्रहकक्षा की हलचल-री तरल गरल की लघु-लहरी, जरा अमर-जीवन की, और न कुछ सुनने वाली, बहरी। (UPSC 1980, 20 Marks, )

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