यदि प्रेमचन्द 'गोदान' को उपन्यास के बदले नाटक के रूप में लिखते, तो आपकी दृष्टि में वे उसमें क्या छोड़ते और जोड़ते? (UPSC 2014, 20 Marks, )

यदि प्रेमचन्द 'गोदान' को उपन्यास के बदले नाटक के रूप में लिखते, तो आपकी दृष्टि में वे उसमें क्या छोड़ते और जोड़ते?