“निबंध-लेखन में आचार्य शुक्ल ने एक साहित्यकार के रूप में ही भावों अथवा मनोविकारों पर विचार किया है, मनोवैज्ञानिक के रूप में नहीं।” — इस कथन के विषय में तर्क प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1998, 55 Marks, )

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