जैसे कहीं बहुत दूर बरफ़ की चोटियों से परिन्दों के झुंड नीचे अनजान देशों की ओर उड़े जा रहे हैं। इन दिनों अक्सर उसने अपने कमरे की खिड़की से उन्हें देखा है धागे से - बँधे चमकीले लटुओं की तरह वे एक लम्बी टेढ़ी-मेढ़ी क़तार में उड़े जाते हैं।
(UPSC 2024, 10 Marks, )
जैसे कहीं बहुत दूर बरफ़ की चोटियों से परिन्दों के झुंड नीचे अनजान देशों की ओर उड़े जा रहे हैं। इन दिनों अक्सर उसने अपने कमरे की खिड़की से उन्हें देखा है धागे से - बँधे चमकीले लटुओं की तरह वे एक लम्बी टेढ़ी-मेढ़ी क़तार में उड़े जाते हैं।
जैसे कहीं बहुत दूर बरफ़ की चोटियों से परिन्दों के झुंड नीचे अनजान देशों की ओर उड़े जा रहे हैं। इन दिनों अक्सर उसने अपने कमरे की खिड़की से उन्हें देखा है धागे से - बँधे चमकीले लटुओं की तरह वे एक लम्बी टेढ़ी-मेढ़ी क़तार में उड़े जाते हैं।
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