जीवन मुँहचाही को नीको, दरस परस दिन रात करति है कान्ह पियारे पी को। नयनन मूँदि-मूँदि किन देखौ बँध्यो ज्ञान पोथी को। आछे सुन्दर स्याम मनोहर और जगत सब फीको। “सुनौ जोग को का लै कीजै जहाँ ज्यान ही जी को ?” खाटी मही नही रुचि मानै सूर खवैया घी को॥
(UPSC 2017, 10 Marks, )
जीवन मुँहचाही को नीको, दरस परस दिन रात करति है कान्ह पियारे पी को। नयनन मूँदि-मूँदि किन देखौ बँध्यो ज्ञान पोथी को। आछे सुन्दर स्याम मनोहर और जगत सब फीको। “सुनौ जोग को का लै कीजै जहाँ ज्यान ही जी को ?” खाटी मही नही रुचि मानै सूर खवैया घी को॥
जीवन मुँहचाही को नीको, दरस परस दिन रात करति है कान्ह पियारे पी को। नयनन मूँदि-मूँदि किन देखौ बँध्यो ज्ञान पोथी को। आछे सुन्दर स्याम मनोहर और जगत सब फीको। “सुनौ जोग को का लै कीजै जहाँ ज्यान ही जी को ?” खाटी मही नही रुचि मानै सूर खवैया घी को॥
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