मूर्ति का निर्माण हो सकता है, मृत्तिका का नहीं! उसी मिट्टी से अच्छी प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है, बुरी भी, पर जहाँ मिट्टी ही न हो, वहाँ कितने ही प्रचार से, कितनी भी शिक्षा से, कितने भी जाज्वल्यमान बलिदान से मूर्ति नहीं बन सकती। (शेखर)। (UPSC 1981, 20 Marks, )

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