शांति-बीन तब तक बजती है नहीं सुनिश्चित सुर में, स्वर की शुद्ध प्रतिध्वनि जब तक उठे नहीं उर-उर में। यह न बाह्म उपकरण, भार बन जो आवे ऊपर से, आत्मा की यह ज्योति, फूटती सदा बिमल अंतर से ॥ (UPSC 2014, 10 Marks, )

शांति-बीन तब तक बजती है नहीं सुनिश्चित सुर में, स्वर की शुद्ध प्रतिध्वनि जब तक उठे नहीं उर-उर में। यह न बाह्म उपकरण, भार बन जो आवे ऊपर से, आत्मा की यह ज्योति, फूटती सदा बिमल अंतर से ॥