अपभ्रंश और अवहट्ठ का तुलनात्मक मूल्यांकन।
(UPSC 2024, 10 Marks, )
अपभ्रंश और अवहट्ठ का तुलनात्मक मूल्यांकन।
Explanation
अपभ्रंश और अवहट्ट का तुलनात्मक मूल्यांकन उनके भाषिक तत्वों, ध्वनि इकाई और व्याकरणिक कोटियों में परिवर्तन के आधार पर किया जा सकता है।
भाषिक तत्व ध्वनि इकाई में परिवर्तन:
अपभ्रंश:
(क) स्वरागम: दो व्यंजनों के मध्य स्वर के उच्चारण को सुगम बनाने की प्रक्रिया। जैसे- आर्य - आरिय, वर्ष - वरिस।
(ख) स्वर लोप: शब्दों के आदि, मध्य और अंत में स्वर का लोप। जैसे- उपविष्टा - बड्ड्ट्ठ (आदि 'उ' का लोप), भविसत - भविस्यदस्त (मध्य 'अ' का लोप)।
(ग) हस्व स्वर का दीर्घ होना: जैसे- कस्स - कासु, विश्वास - विसास।
(घ) अक्षर के स्वरों में परिवर्तन: जैसे- गम्भीर - गहिर, जगन - जहन।
अवहट्ट:
(क) ऋ का रि होना: तृण-तिन, दृष्टि-पिट्ठी।
(ख) 'व्' का प्रयोग: ज्ञानिञ।
(ग) 'ष' का उच्चारण 'ख' होना: पण्डित - खंडित।
(घ) व्यंजनों के अंत में 'अ' दीर्घ होना: कार्य कज्ज, काज।
(ड) बालाघात के परिवर्तन: भिक्षाकारिका - भिखारी।
(च) अनुस्वार का उच्चारण ह्रस्व करके पूर्व स्वर को दीर्घ करना: अञ्चल - आँचल।
व्याकरणिक कोटियों में परिवर्तन:
अपभ्रंश:
(क) संज्ञा रूपों में अंतिम व्यंजन का लोप: आत्मन् - आत्म, जगत् - जग।
(ख) ऋकारान्त प्रातिपदिक का परिवर्तन: पितृ - पिअर, भ्रातृ - भायर।
(ग) दीर्घस्वरान्त प्रातिपदिक का लोप: पूजा - पूज्ज, क्रीडा - कील।
अवहट्ट:
(क) तत्सम् से तद्भव के निर्माण की प्रक्रिया।
(ख) वचन में दो रूपों का प्रयोग: एकवचन और बहुवचन।
(ग) लिंग की संख्या भी दो ही है।
(घ) विभक्ति का रूप: कर्ता एकवचन में ओ, ए, उ तथा बहुवचन में आ, न्ह। कर्म एकवचन में उ, ओ, ए, ह, हि, हु। बहुवचन में न्ह और ति। करण – अधिकरण एकवचन में अ, ए, ऐ, एण, हि, एहि। बहुवचन में हि, हिं, द्य। संबंध एकवचन में हैं, ह, स्स, ए, आर, एरीर। बहुवचन में हुँ, आण। संप्रदान एकवचन में - हिं। बहुवचन - न्ह और तृतीया की अ, ए, एँ, एहि का प्रयोग।
साहित्यिक उदाहरण:
अपभ्रंश और अवहट्ट के साहित्यिक उदाहरणों में 'सरहपा' और 'कन्हपा' के दोहे महत्वपूर्ण हैं। जैसे, सरहपा के दोहे में अपभ्रंश का प्रयोग मिलता है:
"सहज साधु सुभावु न जाई।
सहज सुभावु न जाई।"
यहां 'सुभावु' शब्द अपभ्रंश का उदाहरण है।
अवहट्ट के उदाहरण के लिए, 'कन्हपा' के दोहे में अवहट्ट का प्रयोग देखा जा सकता है:
"कन्हा कहै सुनु भिक्खु।
सहज साधु सुभावु।"
यहां 'भिक्खु' शब्द अवहट्ट का उदाहरण है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि अपभ्रंश और अवहट्ट में ध्वनि और व्याकरणिक परिवर्तन कैसे होते हैं।