ठाकुर ठीक ही तो कहते हैं, जब हाथ में रुपए आ जाएँ, गाय ले लेना। तीस रुपए का कागद लिखने पर कहीं पचीस रुपए मिलेंगे और तीन-चार साल तक न दिए जाएँ, तो पूरे सौ हो जाएँगे। पहले का अनुभव यही बता रहा था कि कर्ज़ वह मेहमान है, जो एक बार आकर जाने का नाम नहीं लेता। (UPSC 2016, 10 Marks, )

ठाकुर ठीक ही तो कहते हैं, जब हाथ में रुपए आ जाएँ, गाय ले लेना। तीस रुपए का कागद लिखने पर कहीं पचीस रुपए मिलेंगे और तीन-चार साल तक न दिए जाएँ, तो पूरे सौ हो जाएँगे। पहले का अनुभव यही बता रहा था कि कर्ज़ वह मेहमान है, जो एक बार आकर जाने का नाम नहीं लेता।