यह तो सुकुल बाबू ही हैं कि टिके हुए हैं। केवल टिके हुए ही नहीं, सबको ठिकाने लेकर टिके हुए हैं। पर मन बेहद क्षुब्ध हो गया है उनका। उन्हें ख़ुद लगने लगा कि राजनीति गुण्डागर्दी के निकट चली गई है। जिस देश में देवतुल्य राजनेताओं की परम्परा रही हो, वहां राजनीति का ऐसा पतन! (UPSC 2004, 20 Marks, )

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