बादि बसन बिनु भूषन भारूं। बादि बिरति बिनु ब्रह्म विचारू॥ सरूज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरि भगति जाय जप जोगा॥ जाँय जीव बिनु देह सुहाई।। बादि मोर सबु बिनु रघुराई॥ जाउं राम पहि आयेसु देहू।। एकहि आंक मोर हित एहू॥ मोहि नृपु करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता' बस कहहूँ॥ (UPSC 1980, 20 Marks, )

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