मेरी भवबाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाईँ पा स्यामु हरित-दुति होइ। कहत नटत रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भी भौन मैं करत हैं नैननु ही सब बात॥ (UPSC 2015, 10 Marks, )

मेरी भवबाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाईँ पा स्यामु हरित-दुति होइ। कहत नटत रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भी भौन मैं करत हैं नैननु ही सब बात॥