रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु नैन।। तो रंत उरबसी, सुनि, राधिके सुजान। तू मोहन कै उर बसी हवै उरबसी-समान॥ (UPSC 2022, 10 Marks, )
रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु नैन।। तो रंत उरबसी, सुनि, राधिके सुजान। तू मोहन कै उर बसी हवै उरबसी-समान॥View Answer
Introduction
Read
More
खेलन सिखए, अलि, भलै चतुर अहेरी मार। कानन-चारी नैन-मृग नागर नरनु सिकार ॥ लग्यो सुमनु है है सफलु, आतप-रोसु निवारि। बारी, बारी आपनी सींचि सुहृदता-बारि॥ (UPSC 2020, 10 Marks, )
खेलन सिखए, अलि, भलै चतुर अहेरी मार। कानन-चारी नैन-मृग नागर नरनु सिकार ॥ लग्यो सुमनु है है सफलु, आतप-रोसु निवारि। बारी, बारी आपनी सींचि सुहृदता-बारि॥View Answer
Introduction
Read
More
पावक सो नयननु लगै जावकु लाग्यो भाल। मुकुर होहुगे नैंक मैं, मुकुर बिलोको लाल।। तख़िन-कनकु कपोल-दुति बिच ही बीच बिकान। लाल लाल चमकतीं चुनीं चौका-चीन्ह-समान। (UPSC 2018, 10 Marks, )
पावक सो नयननु लगै जावकु लाग्यो भाल। मुकुर होहुगे नैंक मैं, मुकुर बिलोको लाल।। तख़िन-कनकु कपोल-दुति बिच ही बीच बिकान। लाल लाल चमकतीं चुनीं चौका-चीन्ह-समान।View Answer
Introduction
Read
More
Introduction
Read
More
Introduction
Read
More
मेरी भवबाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाईँ पा स्यामु हरित-दुति होइ। कहत नटत रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भी भौन मैं करत हैं नैननु ही सब बात॥ (UPSC 2015, 10 Marks, )
मेरी भवबाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाईँ पा स्यामु हरित-दुति होइ। कहत नटत रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भी भौन मैं करत हैं नैननु ही सब बात॥View Answer
Introduction
Read
More
डारे ठोड़ी-गाड़, गहिं नैन-बटोही मारि। चिलक चौंध में रूप ठग, हाँसी-फाँसी डारि॥ तंत्रीनाद, कवित्त रस, सरस राग, रति-रंग। अनबूड़े बूड़े, तरे जे बूड़े सब अंग॥ (UPSC 2013, 10 Marks, )
डारे ठोड़ी-गाड़, गहिं नैन-बटोही मारि। चिलक चौंध में रूप ठग, हाँसी-फाँसी डारि॥ तंत्रीनाद, कवित्त रस, सरस राग, रति-रंग। अनबूड़े बूड़े, तरे जे बूड़े सब अंग॥View Answer
Introduction
Read
More
Introduction
Enroll Now
Introduction
Enroll Now
खेलन सिखए, अलि, भलैँ चतुर अहेरी मार। कानन-चारी नैन-मृग नागर नरनु सिकार।। रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु, नैन। (UPSC 2004, 20 Marks, )
खेलन सिखए, अलि, भलैँ चतुर अहेरी मार। कानन-चारी नैन-मृग नागर नरनु सिकार।। रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु, नैन।Enroll Now
Introduction
Enroll Now
अंग-अंग नग जगमगत दीपसिखा-सी देह। दिया बढ़ाएँ हूँ रै बड़ी उज्यारी गेह।। पत्रा ही तिथि पाइयै वा घर कै चहुँ पास। नितप्रति पून्यौई रहै, आनन ओप उजास। (UPSC 2002, 20 Marks, )
अंग-अंग नग जगमगत दीपसिखा-सी देह। दिया बढ़ाएँ हूँ रै बड़ी उज्यारी गेह।। पत्रा ही तिथि पाइयै वा घर कै चहुँ पास। नितप्रति पून्यौई रहै, आनन ओप उजास।Enroll Now
Introduction
Enroll Now
मेरी भव-बाधा हरी, राध्या नागरि सोइ। जा तन की झाँई परै, स्यामु हरित-दुति होङ।। कहल, नटल, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियाल। भरे भौन मैं करत हैं, नैननु हीं सब बात।। नहिं परागु नहिं मधुर मधु नहिं बिकासु इहिं काल। अली, कली ही सौं बंध्यौ, आगं कौन हवाल।। (‘बिहारी-सतसई’, दोहा सं. 1, 32, 38)। (UPSC 2000, 20 Marks, )
मेरी भव-बाधा हरी, राध्या नागरि सोइ। जा तन की झाँई परै, स्यामु हरित-दुति होङ।। कहल, नटल, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियाल। भरे भौन मैं करत हैं, नैननु हीं सब बात।। नहिं परागु नहिं मधुर मधु नहिं बिकासु इहिं काल। अली, कली ही सौं बंध्यौ, आगं कौन हवाल।। (‘बिहारी-सतसई’, दोहा सं. 1, 32, 38)।Enroll Now
Introduction
Enroll Now