रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु नैन।। तो रंत उरबसी, सुनि, राधिके सुजान। तू मोहन कै उर बसी हवै उरबसी-समान॥
(UPSC 2022, 10 Marks, )
रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु नैन।। तो रंत उरबसी, सुनि, राधिके सुजान। तू मोहन कै उर बसी हवै उरबसी-समान॥
रससिंगार-मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना खंजनु गंजनु नैन।। तो रंत उरबसी, सुनि, राधिके सुजान। तू मोहन कै उर बसी हवै उरबसी-समान॥
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