सतगुरु बपुरा क्या करे, जे शिषही माँहि चूक। भावै त्यूँ प्रमोद लै, ज्यूं बंसि बजाई फूक ॥ कबीर सूता क्या करै उठि न रोवै दुक्ख। जाका बासा गोर मैं, सो क्यूँ सोवै सुक्ख॥ बिरह भुवंगम तन बसै मन्त्र न लागै कोई। राम बियोगी ना जिवै जिवै तो बौरा होई।। (UPSC 1990, 20 Marks, )

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