आपका अपने असामियों के साथ बहुत अच्छी बर्ताव है, मगर प्रश्न यह है कि उसमें स्वार्थ है या नहीं? इसका एक कारण क्या यह नहीं हो सकता कि मद्धिम आँच में भोजन ज्यादा स्वादिष्ट पकता है? गुड़ से मारने वाला ज़हर से मारने वाले की अपेक्षा कहीं सफल हो सकता है। मैं तो केवल इतना जानता हूँ कि हम या तो साम्यवादी हैं या नहीं हैं। हैं तो उसका व्यवहार करें, नहीं हैं, तो बकना छोड़ दें। मैं नकली ज़िंदगी का विरोधी हूँ। (UPSC 1996, 20 Marks, )

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