जाका गुर भी अंधला, चेला है जा चंध। अंधे अंधा ठेलिया, दृन्यूं कूप पडंत॥ ना गुर मिल्या न सिष भया, लालचि खेल्या दाव। दून्यूं बूड़े धार मैं, चढ़ि पाथर की नाव॥
(UPSC 2019, 10 Marks, )
जाका गुर भी अंधला, चेला है जा चंध। अंधे अंधा ठेलिया, दृन्यूं कूप पडंत॥ ना गुर मिल्या न सिष भया, लालचि खेल्या दाव। दून्यूं बूड़े धार मैं, चढ़ि पाथर की नाव॥
जाका गुर भी अंधला, चेला है जा चंध। अंधे अंधा ठेलिया, दृन्यूं कूप पडंत॥ ना गुर मिल्या न सिष भया, लालचि खेल्या दाव। दून्यूं बूड़े धार मैं, चढ़ि पाथर की नाव॥
(UPSC 2019, 10 Marks, )