सबने भी अलग-अलग संगीत सुना इसको वह कृपा वाक्य था प्रभुओं का उसको आतंक मुक्ति का आश्वासन इसको वह भरी तिजोरी में सोने की खनक। उसे बटुली में बहुत दिनों के बाद अन्न की सोंधी खुशबू। किसी एक को नयी वधू की सहमी सी पायल ध्वनि किसी दूसरे को शिशु की किलकारी 'एक किसी को जाल फँसी मछली की तड़पन--एक अपर को चहक मुक्त नभ में उड़ती चिड़िया की। 'एक तीसरे को मंडी की ठेलमठेल, ग्राहकों की आस्पर्धा भली बोलियाँ, चौथे को मंदिर की ताल-युक्त घंटा-ध्वनि। और पाँचवें को लोहे पर सधे हथौड़े की सम चोर और छठें को लंगर पर कसमसा रही नौका पर लहरों की अविराम थपक 'बटिया पर चमरौधे की रुंधी चाम सातवें के लिए-- और आठवें को कुलिया की कटी मेड़ से बहते जल की छुल-छुल। इसे गमक नद्टिन की ऐड़ी के घुँघरू की। उसे युद्ध का ढोल। इसे संझा-गोधूली की लघु टुन-टुन उसे प्रलय का डमरू नाद। इसको जीवन की पहली अंगड़ाई पर उसको महाजृंभ विकराल काल सब डूबे, तिरे, झिपे जागे हो रहे वशंबद स्तब्ध इयत्ता सबकी अलग-अलग जागी।। (UPSC 2015, 10 Marks, )

सबने भी अलग-अलग संगीत सुना इसको वह कृपा वाक्य था प्रभुओं का उसको आतंक मुक्ति का आश्वासन इसको वह भरी तिजोरी में सोने की खनक। उसे बटुली में बहुत दिनों के बाद अन्न की सोंधी खुशबू। किसी एक को नयी वधू की सहमी सी पायल ध्वनि किसी दूसरे को शिशु की किलकारी 'एक किसी को जाल फँसी मछली की तड़पन--एक अपर को चहक मुक्त नभ में उड़ती चिड़िया की। 'एक तीसरे को मंडी की ठेलमठेल, ग्राहकों की आस्पर्धा भली बोलियाँ, चौथे को मंदिर की ताल-युक्त घंटा-ध्वनि। और पाँचवें को लोहे पर सधे हथौड़े की सम चोर और छठें को लंगर पर कसमसा रही नौका पर लहरों की अविराम थपक 'बटिया पर चमरौधे की रुंधी चाम सातवें के लिए-- और आठवें को कुलिया की कटी मेड़ से बहते जल की छुल-छुल। इसे गमक नद्टिन की ऐड़ी के घुँघरू की। उसे युद्ध का ढोल। इसे संझा-गोधूली की लघु टुन-टुन उसे प्रलय का डमरू नाद। इसको जीवन की पहली अंगड़ाई पर उसको महाजृंभ विकराल काल सब डूबे, तिरे, झिपे जागे हो रहे वशंबद स्तब्ध इयत्ता सबकी अलग-अलग जागी।।