हरि हैं राजनीति पढ़ि आए। समुझी बात कहत मधुकर जो? समाचार कछु पायो? इक अति चतुर हुते पहिले ही, अरु करि नेह दिखाए। जानी बुद्धि बड़ी जुबतिन को जोग संदेस पठाए। भले लोग आगे के सखि री! परहित डोलत धाए। वे अपने मन फेरि पाइए जे हैं चलत चुराए।। ते क्यों नीति करत आपनु जे औरनि रीति छुड़ाए? राजधर्म सब भए सूर जहँ प्रजा न जायँ सताए।।
(UPSC 2008, 20 Marks, )
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हरि हैं राजनीति पढ़ि आए। समुझी बात कहत मधुकर जो? समाचार कछु पायो? इक अति चतुर हुते पहिले ही, अरु करि नेह दिखाए। जानी बुद्धि बड़ी जुबतिन को जोग संदेस पठाए। भले लोग आगे के सखि री! परहित डोलत धाए। वे अपने मन फेरि पाइए जे हैं चलत चुराए।। ते क्यों नीति करत आपनु जे औरनि रीति छुड़ाए? राजधर्म सब भए सूर जहँ प्रजा न जायँ सताए।।
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