भूमिपाल, ब्यालंपाल, नाकपाल, लोकपाल कारन कृपालु, में सब के जो का थाह ला। कादर को आदर नाहि काहू के देखियत, सबनि सोहात है सेवा-सुजानि टाहली॥ तुलसी सुभाय कहैं, नाहीं कछु पच्छपात, कौनै ईस छिये कीस भालु खास माहली। राम ही के द्वारे पे बोलाइ सनमानियत, मोसे दीन दूबरे कुपूत कूर काहली॥ (UPSC 1984, 20 Marks, )

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