नवौं पँवरि पर दसौं दुआरू। तेहि पर बाज राज घरिआरू। घरी सो बैठि गनै घरिआरी। पहर पहर सो आपनि बारी। जबहिं घरी पूजी वह मारा। घरी घरी घरिआर पुकारा। परा जो डाँड जगत सब डाँड़ा। का निचिंत माँटी कर भाँडा॥ (UPSC 2011, 20 Marks, )

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