गोपाल बैरनि भइँ कुंजैं। तब ये लतां लगति अति सीतल, अब भइँ विषम ज्वाल की पुजैं।। वृथा बहति जमुना, खग बोलत, वृथा कमल फूलै, अलि गुंजै। पवन पानि घनसार संजीवनि दधिसुत किरन भानु भर भुंजै। ए, ऊधो, कहियो माधव सों बिरह कदन करि मारत लुंजैं। सूरदास प्रभु को मग जोवत अँखियाँ भई बरन ज्यों गुंजैं।।
(UPSC 2006, 20 Marks, )
Enroll
Now
गोपाल बैरनि भइँ कुंजैं। तब ये लतां लगति अति सीतल, अब भइँ विषम ज्वाल की पुजैं।। वृथा बहति जमुना, खग बोलत, वृथा कमल फूलै, अलि गुंजै। पवन पानि घनसार संजीवनि दधिसुत किरन भानु भर भुंजै। ए, ऊधो, कहियो माधव सों बिरह कदन करि मारत लुंजैं। सूरदास प्रभु को मग जोवत अँखियाँ भई बरन ज्यों गुंजैं।।
(UPSC 2006, 20 Marks, )