किन्तु, गहरी बावड़ी को भीतरी दीवार पर तिरछी गिरी रवि-रश्मि के उड़ते हुए परमाणु, जब तल तक पहुंचते हैं कभी तब ब्रह्मराक्षस समझता है, सूर्य ने झुककर “नमस्ते” कर दिया।। (UPSC 2004, 20 Marks, )

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