अलस अँगड़ाई लेकर मानो जाग उठी थी वीणा : किलक उठे थे स्वर-शिशु। नीरव पद रखता जालिक मायावी सधे करों से धीरे-धीरे डाल रहा था जाल हेम तारों का। (UPSC 2020, 15 Marks, )

अलस अँगड़ाई लेकर मानो जाग उठी थी वीणा : किलक उठे थे स्वर-शिशु। नीरव पद रखता जालिक मायावी सधे करों से धीरे-धीरे डाल रहा था जाल हेम तारों का।