ध्वन्यात्मकता, लाक्षिणकता, उपचारवक्रता और अनुभूति की विवृति को छायावाद की विशेषता मानने वाले प्रसाद ने उसे 'कामायनी' में कैसा मूर्त किया है ? स्पष्ट कीजिए। (UPSC 1995, 55 Marks, )

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